Thursday, June 24, 2010

गुलामी से बेहतर है संघर्ष : चेतन


फिल्म राजनीति में अभिनय करने वाले चेतन पंडित कहते हैं कि भोपाल बहुत खूबसूरत शहर है। यहां की लोकेशन किसी भी फिल्म निर्माता को अपनी ओर खींच सकती है।
जिन आंखों में सपने होते हैं, उन आंखों में भविष्य होता है और जहां भविष्य होता है, वहां आगे बढ़ने की अदम्य इच्छाशक्ति का संचय होने लगता है। गुलामी के कसैले अहसासों से निरंतर संघर्ष करने को बेहतर बताने वाले अभिनेता चेतन पंडित हिन्दुस्तानी फिल्म को किसी दायरे में समेटना नहीं चाहते। इन दिनों उनकी केंद्रीय चिंता में प्रदेश में एक मजबूत और बेहतर फिल्म इंडस्ट्री का निर्माण होना है। इसमें संस्कृति और इतिहास की शानदार चीजें शामिल हों। इस अनूठे प्रयास को साकार करने की दिशा में अपनी पहल और इस दौर की राजनीति और कला जगत से जुड़ी हर पहलू पर उन्होंने बड़ी संजीदगी और ईमानदारी से बेबाक संवाद किया। चेतन पंडित इन दिनों प्रकाश झा की फिल्म राजनीति में राजनेता की भूमिका अदा कर रहे हैं। इससे पूर्व उन्होंने प्रकाश झा के साथ गंगाजल, लोकनायक, अपहरण जैसी फिल्मों में काम किया है। विश्राम सावंत के निर्देशन में उनकी अगली फिल्म 26 नवंबर को हुए मुंबई हमले पर आधारित है, इस फिल्म में वे मेजर उन्नीकृषणन की भूमिका में होंगे।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय ने चेतन पंडित को कितना गढ़ा?
गुरु हमें सिखाते हैं या नहीं, ऐसा सोचकर हम कभी नहीं सीख सकते। हमारी प्रवृत्ति तो ऐसी होनी चाहिए कि हम कैसे और क्या सीखें। हमें अपने अंदर इतनी कूव्वत पैदा करनी चाहिए कि गुरु हमें सिखाने के लिए बाध्य हो।

विद्यालय में प्रवेश के लिए किसी प्रकार की विशेष तैयारी ?
दाखिले से पूर्व भारत भवन के बहिरंग प्रांगण में गोपाल दुबे जी ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की तैयारी में मदद की थी।

बतौर कलाकार मुंबई में कितना संघर्ष करना पड़ा?
गुलामी के कसैले अहसासों से निरंतर संघर्ष को मैं बेहतर मानता हूं। आज जो जहां हैं, सभी को अपने-अपने ढंग से संघर्ष करना पड़ रहा है। यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। मुंबई जाने के बाद हमने एफ.एम. में बतौर उद्घोषक काम किया। उस दौरान प्रतिदिन चार निर्माता-निर्देशक के पास अपनी पोर्टफोलियो के साथ जाया करते थे। यही संपर्क आगे काम आया। इसी तरह मैं एकता कपूर, प्रकाश झा से मिला था। जब प्रकाश झा लोकनायक जयप्रकाश पर फिल्म बनाने की बात सोच रहे थे, तो उन्हें मेरी याद आई और उन्होंने मुझे बुलवा भेजा। उन्होंने मुझे इशारा भर किया था और मैं उत्साह और आत्मविश्वास के साथ हां कह दिया। इसके बाद हमने लोकनायक पर अध्ययन करना शुरू किया। इससे पूर्व सेंट्रल स्कूल में पढ़ाई के दौरान सिर्फ एक अध्याय ही उन पर पढ़ा था। जब उन पर अध्ययन प्रारंभ किया तो उनका शख्सियत सही मायने में समझ में आया।

आपके पसंदीदा लेखक?
वैसे तो हमने दुनिया की कई भाषाओं और कई विधाओं की पुस्तकें पढ़ता हूं, लेकिन मुझे प्रेमचंद की बूढ़ी काकी और ईदगाह कहानी आज भी याद है। बंगला उपन्यास कोसाई बागान का भूत, रविशंकर की पत्नी और उस्ताद अलाउद्दीन खां साहब की बेटी अन्नपूर्णा की जीवनी मुझे बहुत प्रिय है।

सिनेमा को ग्लेमर मानने वाले नवोदित कलाकारों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
सतही ग्लेमर देखकर नहीं,पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ फिल्म इंडस्ट्री में आए। मप्र में कलाकारों में अद्भुत अभिनय क्षमता है, इसलिए निरंतर कार्यशाला आयोजित होने चाहिए। उन्होंने एक कविता सुनाकर कि पेड़ खड़े हैं, क्योंकि जमीन से गड़े हैं।

क्या आपके जीवन में कनुप्रिया के आने से आपके बहुआयामी प्रतिभा को विस्तार मिला?
कनु द्वारा संचालित चिल्ड्रेन थिएटर किल्लौल में संगीत देता हूं। कनु निरंतर बच्चों के लिए कार्यशाला आयोजत करती हैं। अभी गर्मी में पृथ्वी थिएटर के साथ मिलकर कार्यशाला आयोजित करने जा रही हैं।

स्त्री शक्ति को आप किस तरह परिभाषित करेंगे?
मां ने मुझे पहली बार नाटक के लिए मंच दिया। आदिशक्ति के रूप में हम देवी को पूजते हैं। मैं यह मानता हूं कि हर दिन स्त्री के नाम होना चाहिए। वैचारिक रूप से हमें उनका सम्मान करना चाहिए, न कि एक दिन। लेकिन पिता की भूमिका भी मेरे लिए मायने रखता है, क्योंकि उन्होंने मुझे सदा मार्गदर्शन किया।

कहीं सचमुच राजनेता बनने का इरादा तो नहीं?
बिल्कुल नहीं, अभिनय में अभी लम्बी यात्रा तय करनी है।

यह साक्षात्कार भोपाल से प्रकाशित पीपुल्स समाचार के लिए रूबी सरकार ने लिया था

8 comments:

  1. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  2. बहुत ही सटीक विचार, मैं भी इस बात का अनुकरण करता हूँ.
    हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

    मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

    यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

    शुभकामनाएं !


    "टेक टब" - ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )

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  3. आपका लेख पढ़कर हम और अन्य ब्लॉगर्स बार-बार तारीफ़ करना चाहेंगे पर ये वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) बीच में दीवार बन जाता है.
    आप यदि इसे कृपा करके हटा दें, तो हमारे लिए आपकी तारीफ़ करना आसान हो जायेगा.
    इसके लिए आप अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड (dashboard) में जाएँ, फ़िर settings, फ़िर comments, फ़िर { Show word verification for comments? } नीचे से तीसरा प्रश्न है ,
    उसमें 'yes' पर tick है, उसे आप 'no' कर दें और नीचे का लाल बटन 'save settings' क्लिक कर दें. बस काम हो गया.
    आप भी न, एकदम्मे स्मार्ट हो.
    और भी खेल-तमाशे सीखें सिर्फ़ "टेक टब" (Tek Tub) पर.
    यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -


    वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?

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  4. जिन्दा लोगों की तलाश!
    मर्जी आपकी, आग्रह हमारा!!


    काले अंग्रेजों के विरुद्ध जारी संघर्ष को आगे बढाने के लिये, यह टिप्पणी प्रदर्शित होती रहे, आपका इतना सहयोग मिल सके तो भी कम नहीं होगा।
    =0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=

    सच में इस देश को जिन्दा लोगों की तलाश है। सागर की तलाश में हम सिर्फ बूंद मात्र हैं, लेकिन सागर बूंद को नकार नहीं सकता। बूंद के बिना सागर को कोई फर्क नहीं पडता हो, लेकिन बूंद का सागर के बिना कोई अस्तित्व नहीं है। सागर में मिलन की दुरूह राह में आप सहित प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। यदि यह टिप्पणी प्रदर्शित होगी तो विचार की यात्रा में आप भी सारथी बन जायेंगे।

    हमें ऐसे जिन्दा लोगों की तलाश हैं, जिनके दिल में भगत सिंह जैसा जज्बा तो हो, लेकिन इस जज्बे की आग से अपने आपको जलने से बचाने की समझ भी हो, क्योंकि जोश में भगत सिंह ने यही नासमझी की थी। जिसका दुःख आने वाली पीढियों को सदैव सताता रहेगा। गौरे अंग्रेजों के खिलाफ भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, असफाकउल्लाह खाँ, चन्द्र शेखर आजाद जैसे असंख्य आजादी के दीवानों की भांति अलख जगाने वाले समर्पित और जिन्दादिल लोगों की आज के काले अंग्रेजों के आतंक के खिलाफ बुद्धिमतापूर्ण तरीके से लडने हेतु तलाश है।

    इस देश में कानून का संरक्षण प्राप्त गुण्डों का राज कायम हो चुका है। सरकार द्वारा देश का विकास एवं उत्थान करने व जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा खडा करने के लिये, हमसे हजारों तरीकों से टेक्स वूसला जाता है, लेकिन राजनेताओं के साथ-साथ अफसरशाही ने इस देश को खोखला और लोकतन्त्र को पंगु बना दिया गया है।

    अफसर, जिन्हें संविधान में लोक सेवक (जनता के नौकर) कहा गया है, हकीकत में जनता के स्वामी बन बैठे हैं। सरकारी धन को डकारना और जनता पर अत्याचार करना इन्होंने कानूनी अधिकार समझ लिया है। कुछ स्वार्थी लोग इनका साथ देकर देश की अस्सी प्रतिशत जनता का कदम-कदम पर शोषण एवं तिरस्कार कर रहे हैं।

    आज देश में भूख, चोरी, डकैती, मिलावट, जासूसी, नक्सलवाद, कालाबाजारी, मंहगाई आदि जो कुछ भी गैर-कानूनी ताण्डव हो रहा है, उसका सबसे बडा कारण है, भ्रष्ट एवं बेलगाम अफसरशाही द्वारा सत्ता का मनमाना दुरुपयोग करके भी कानून के शिकंजे बच निकलना।

    शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदर्शों को सामने रखकर 1993 में स्थापित-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)-के 17 राज्यों में सेवारत 4300 से अधिक रजिस्टर्ड आजीवन सदस्यों की ओर से दूसरा सवाल-

    सरकारी कुर्सी पर बैठकर, भेदभाव, मनमानी, भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण और गैर-कानूनी काम करने वाले लोक सेवकों को भारतीय दण्ड विधानों के तहत कठोर सजा नहीं मिलने के कारण आम व्यक्ति की प्रगति में रुकावट एवं देश की एकता, शान्ति, सम्प्रभुता और धर्म-निरपेक्षता को लगातार खतरा पैदा हो रहा है! अब हम स्वयं से पूछें कि-हम हमारे इन नौकरों (लोक सेवकों) को यों हीं कब तक सहते रहेंगे?

    जो भी व्यक्ति इस जनान्दोलन से जुडना चाहें, उसका स्वागत है और निःशुल्क सदस्यता फार्म प्राप्ति हेतु लिखें :-

    (सीधे नहीं जुड़ सकने वाले मित्रजन भ्रष्टाचार एवं अत्याचार से बचाव तथा निवारण हेतु उपयोगी कानूनी जानकारी/सुझाव भेज कर सहयोग कर सकते हैं)

    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
    राष्ट्रीय अध्यक्ष
    भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
    राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यालय
    7, तँवर कॉलोनी, खातीपुरा रोड, जयपुर-302006 (राजस्थान)
    फोन : 0141-2222225 (सायं : 7 से 8) मो. 098285-02666

    E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in

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  5. आपके ब्लोग पर आ कर अच्छा लगा! ब्लोगिग के विशाल परिवार में आपका स्वागत है! अन्य ब्लोग भी पढ़ें और अपनी राय लिखें! हो सके तो follower भी बने! इससे आप ब्लोगिग परिवार के सम्पर्क में रहेगे! अच्छा पढे और अच्छा लिखें! हैप्पी ब्लोगिग!

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  6. पुरुशोत्तम मीणा की अपील विचारणीय है।रुबी सरकार का आलेख संघर्ष के महत्व को चिन्हित करता है। आभार!

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  7. "मां ने मुझे पहली बार नाटक के लिए मंच दिया। आदिशक्ति के रूप में हम देवी को पूजते हैं। मैं यह मानता हूं कि हर दिन स्त्री के नाम होना चाहिए। वैचारिक रूप से हमें उनका सम्मान करना चाहिए, न कि एक दिन। लेकिन पिता की भूमिका भी मेरे लिए मायने रखता है, क्योंकि उन्होंने मुझे सदा मार्गदर्शन किया।"

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  8. " बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नहीं हो सकता "

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति.कॉम "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . अपने राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक और मीडिया से जुडे आलेख , कविता , कहानियां , व्यंग आदि जनोक्ति पर पोस्ट करने के लिए नीचे दिए गये लिंक पर जाकर रजिस्टर करें . http://www.janokti.com/wp-login.php?action=register,
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