Friday, September 18, 2015

Khilchipur kila

                                                            fखलचीपुर का किला
रियासत की स्थापना  के साथ ही 1544 में खलचीपुर राजमहल की नींव रखी गई थी।  खिलचीपुर का यह ऐतिहासिक राजमहल महाराज उग्रसेन द्वारा शुरू करवाया गया था। आज भी यह राजमहल नगर के रहवासियों के साथ-साथ देश भर के पर्यटकों के लिए आकर्षक का केंद्र है। अद्भुत                            
नक्काशी एवं  निर्माणकला की सौंदर्य लिये हुए खिलचीपुर का यह किला अंग्रेजों के समय से राजघराने के ऐतिहासि गौरव एवं विपरीत  परिस्थितियों में स्वाभिमान की ऐतिहासिक गाथा सुनाता है।
  किले की मजबूती एवं महल के भीतरी कक्षों में की गई नक्काशी दर्शनीय है। की हस्त शिल्पकारी की दक्षता को दर्शाता है। किले में मौजूद राघवजी का प्राचीन मंदिर नगरवासियों व भक्तों के श्रद्धा का केन्द्र है। प्रत्येक उत्सव में आम जनता के लिए किले का द्वार खोल दिया जाता है।
खिलचीपुर रियासत की स्थापना और किले की नींव 1544 बसंत पंचमी के दिन रखी गई थी। उग्रसेन गागरोन के खींची वंश के महान योद्धा व राजा अचलदास खींची व प्रसिद्ध भक्तिकालीन संत प्रतापराव (पीपाजी महाराज) के वंशज थे। 1423 में हुए गागरोन के जोहर के बाद खींची राजवंश ने अपनी राजधानी महुमैदाना (बोरदा राजस्थान) में स्थापित की, जहां अचलदास के प्रथम पुत्र धीरदेव ने राज्य संभाला। वहां से सुरक्षित स्थान खिलचीपुर को राज्य में शामिल करने के बाद खींची यहां आ बसे।  1787 में दीवान दीपसिंह के शासनकाल में दीपगढ़ का निर्माण हुआ, जो सोमवार हाट बाजार के कारण वर्तमान में सोमवारिया के नाम से जाना जाता है। लगभग 707 किलोमीटर में फैली खिलचीपुर रियासत में कभी 283 गांव शामिल थे। सन् 1901 में  रियासत की आबादी  मात्र  31 हजार 143 थी।  महल व नगर निर्माण में दीवान शेरसिंह और राव बहादुर अमरसिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रहीं।  महल के बड़े भाग का निर्माण  दीवान शेरसिंह , द्वारा और उनकी पत्नी द्वारा कल्याण रायजी के मंदिर का निर्माण करवाया गया, जबकि अमरसिंह द्वारा  महल के भीतर अमरेशवर महादेव की स्थापना की गई। इसके अतिरिक्त रघुनाथजी का मंदिर, गंगा तट पर अमरनिवास, माता रातादेवी मंदिर, उकारनाथ मंदिर, शहरकोट, तोपखाना गेट के पास सरायभवन आदि का निर्माण राव बहादुर अमर सिंह के शासनकाल में हुए।  विजयगढ़ कोठी (वर्तमान में तहसील भवन) श्रीनाथजी का मंदिर और नरसिंह मंदिर राव बहादुर भवानीसिंह के कार्यकाल में बने। वर्तमान में खिलचीपुर राजपरिवार यहां निवास करता है।


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