Saturday, September 16, 2023

मध्य प्रदेश में गांवों की तस्वीर पलट रहा सामुदायिक रेडियो

 




मध्य प्रदेश में गांवों की तस्वीर पलट रहा सामुदायिक रेडियो

रूबी सरकार

मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों में बैगाभीलसहरियागोंडभारिया और कोरकू जैसी जनजातियों के अपने सामुदायिक रेडियो हैंजिन पर ये अपनी ही बोली-भाषा में कार्यक्रम बनाते और प्रसारित करते हैं। लोकगीतलोक-कहानियांभजन से लेकर कविताएं और राजनीतिक परिचर्चा तक इन बोलियों में होती है। दिलचस्प यह कि इनके कार्यक्रमों को सुना भी खूब जाता है।

दरअसल भारत सामुदायिक विविधता वाला देश है। इसलिए सीमित क्षेत्र विशेष में उनकी भाषा में जानकारी पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम आज भी रेडियो बना हुआ है। इससे वहां क्षेत्र विशेष के कलाकारों को उनकी भाषा में बात करने वालों को काम मिलता है। ं गांव में  प्रचार-प्रसार और जागरूकता फैलाने का बहुत बड़ा माध्यम रेडियो है। बच्चों के टीकाकरण हो या अन्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारीषिक्षाविकास और रोजगार की बातेंउन्नत कृषि की जानकारी सब कुछ रेडियों रूपक के माध्यम से दी जाती है। इससे समुदाय का जुड़ाव भी होता है।

हुआ यह कि 1991 के बाद उदारीकरण के दौर में कुछ बड़ा और विराट करने के चक्कर में रेडियों को खूंटी पर टांग दिया गया था और उसके बदले कई अन्य माध्यम सामने आ गए थे। जिसे समाज ने हाथों-हाथ लियालेकिन समय बीतने के साथ-साथ समुदाय व सरकार दोनों को महसूस होने लगा कि एक बड़ा वर्ग जानकारी के अभाव में पीछे छूट रहा है। तब दोबारा से रेडियों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास शुरू हुआ।

 मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल जिले झाबुआ का छोटा-सा गांव गडवाड़ा के आदिवासी आज रेडियो की आवाज से जागते हैं। यहां महान क्रांतिकारी टंट्या मामा के नाम पर सामुदायिक रेडियो शुरू हुआ , जिस पर यहां की स्थानीय भीली बोली में कार्यक्रम प्रसारित होते हैंजिन्हें आदिवासी बड़े चाव से सुनते हैं।

 इसी तरह बैतूल जिले के चिचोली में गुनेश मरकाम और साथी मिलकर गोंड भाषा में कार्यक्रम बनाते और प्रसारित करते हैं। इस रेडियो केंद्र के कारण  आसपास के 20 से अधिक गांवों के लिए किसी सुपरस्टार से कम नहीं हैं।

माखन पुरम  में कर्मवीर सामुदायिक रेडियो केंद्र 90.0 एफएम शुरू

इसी कड़ी में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय ने पहल करते हुए अपने नए परिसर माखनपुरम  में सामुदायिक रेडियो कर्मवीर का प्रसारण   प्रारंभ कर दिया है। विश्वविद्यालय के कुलगुरु  प्रो डाॅ केजी सुरेश का  मानना है कि सामुदायिक रेडियो कर्मवीर आसपास के क्षेत्रों में बदलाव लाने का एक माध्यम होगा । प्रो सुरेश कहते हैं इसके जरिए गांवकस्बो के लोगों तक पहुंचा जा सकता है ,उनके सुख-दुख में भागीदार बन सकते हैं। रेडियो कर्मवीर में सुबह 9 से 12 बजे तक विविध कार्यक्रम प्रसारित किए जाएंगे। जो विश्वविद्यालय के विद्यार्थी तैयार करेंगे। कंटेंट में ग्रामीणों की भी भागीदारी रहेगी।

उन्होंने कहा कि ये रेडियो भोपाल के शहरी इलाकों के साथ साथ गोरेगांवबिशनखेड़ीमुगलिया छापनीलबड़रातीबड़ सहित कई अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी सुना जा सकेगा। सरकारी ग्रामीण विकास की योजनाओं के प्रति जागरूक करने में ये रेडियो चैनल अहम भूमिका निभाएगा। प्रो. . सुरेश के अनुसार‘विद्यार्थियों के माध्यम से जल्द ही ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगेजिनके माध्यम से यह जानकारी भी ली जाएगी कि ग्रामीण किस तरह के रेडियो कार्यक्रम सुनना पसंद करते हैं।

इससे जहां माखन पुरम के आस-पास के ग्रामीण अपने में सिमटे-सिमटे रहते थेअब सामुदायिक रेडियो कर्मवीर के कारण दुनिया-जहान के समाचार सुन पाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात के साथ-साथ सरकारी योजनाओं की जानकारी भी उन्हें मिलेगी। योजनाओं को समझ कर उनके लिए आवेदन करेंगे और उन्हें लाभ पहुंचाने में विद्यार्थी उनकी मदद करेंगे। रेडियो के माध्यम से ग्रामीण और विद्यार्थियों के बीच एक संवाद स्थापित होगा।

फिलहाल मप्र में केवल जनजातीय क्षेत्रों में ही नौ सामुदायिक रेडियो केंद्र हैं। इनमें आदिवासी बहुल जिला डिंडौरी के चाडा में बैगा रेडियोधुर नक्सली जिला बालाघाट के बैहर में बैगा सामुदायिक रेडियोधार के नालछा में भील रेडियोझाबुआ के मेघनगर में भील सामुदायिक रेडियो व गडवाड़ा गांव में टंट्या मामा रेडियोआलीराजपुर के भाभरा में भीली रेडियोश्योपुर के सेसईपुरा में सहरिया रेडियोबैतूल के चिचोली में गोंड रेडियोगुना के उमरी में भील रेडियोछिंदवाड़ा के बिजौरी में भारिया रेडियो और खंडवा के खालवा में कोरकू सामुदायिक रेडियो धूम मचा रहे हैं। इसके अलावा प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित शासकीय सरोजिनी नायडू कन्या स्कूल में तो सामुदायिक रेडियो के कारण कमाल हो गया है।

क्रांतिकारियों की गौरव गाथा गाता है रेडियो आजाद हिंद 90.8

मप्र सरकार का स्वराज संस्थान संचालनालय भोपाल से रेडियो आजाद हिंद का संचालन करता है। इस सामुदायिक रेडियो पर देश-प्रदेश के क्रांतिकारियों की गौरव गाथा सुनाई जाती है। लोग जैसे ही 90.8 पर ट्यून-इन करते हैंउन्हें 1857 की क्रांति से लेकर भारत को स्वतंत्र करवाने में प्राण न्योछावर कर देने वाले वीरों तक की गर्व से भरी कहानियां सुनने को मिलती हैं। इस रेडियो के कारण प्रदेश के स्कूली बच्चे भारत के स्वतंत्रता संग्राम को सही अर्थों में जानने-समझने लगे हैं।

 Amrit sandesh 13 Autust,202


                                               


No comments:

Post a Comment